राजीव प्रताप रूडी ने सांसद निधि के दावों को बताया भ्रामक

 

हाल ही में कुछ मीडिया संस्थानों ने दावा किया कि पांच सालों में बिहार के लोकसभा सांसदों ने अपने फंड का पूरा उपयोग नहीं किया। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 40 लोकसभा सांसदों को जितना फंड मिला, उसकी दस फीसदी राशि अब भी बची हुई है। वहीं कुछ सांसदों के फंड़ में पांच करोड़ से अधिक राशि बची हुई हैं जो कुल राशि का 20 फीसदी है।

चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण अब सांसद इस राशि का प्रयोग नहीं कर पाएगे। इसके बाद सांसद अपने फंड से कार्य कराने की अनुंशसा नहीं कर सकेंगे। ऐसे में जिन सांसदों के कोटे की राशि बच गई, चुनाव जीतकर आने वाले सांसद उसे खर्च करेंगे। ऐसा बताया जा रहा है कि इस मामले में सबसे अधिक राशि 15 करोड़ राजीव प्रताप रूडी के फंड़ में बची हुई है, तो सबसे कम राशि सुशील सिंह की 25 लाख बचे हैं।

वही सारण के सांसद राजीव प्रताप रूडी का दावा है कि उनको मिली निधि का शत प्रतिशत उपयोग हुआ है। पर, भ्रामक, मिथ्या और आधारहीन समाचार प्रकाशित कर आमजन के साथ धोखा किया जा रहा है। अध्ययन, अध्यापन के साथ-साथ आंकड़ों का अद्यतन विश्लेषण पत्रकारिता का प्रमुख अस्त्र है। बावजूद इसके सनसनी फैलाने, सबसे आगे होने या एक्सक्लूसिव के फेर में पत्रकार स्वयं को और वो जिस बैनर के तहत काम करते है उसकी भारी बेइज्जती कर डालते है। ऐसा ही एक मामला मेरे संसदीय क्षेत्र सारण को लेकर एक राष्ट्रीय अखबार द्वारा लीड के रूप में इसे प्रकाशित किया गया है। जो कि अद्यतन जानकारी के अभाव में अखबार की साख को हानी पहुंचा रहा है।पुराने आंकड़े को लेकर यह कहा गया है कि मैंने संसदीय विकास निधि से राशि का समुचित उपयोग अपने क्षेत्र के विकास के लिए नहीं किया है जो बिलकुल गलत है। खबर लिखने वाले पत्रकार को आंकड़ों का विश्लेषण करने की आवश्यकता है। इसकी जानकारी योजना कार्यान्वयन विभाग या जिला योजना पदाधिकारी के कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है। पर, शायद उक्त खबर के पत्रकार को इसकी जानकारी नहीं है कि आंकड़ा कहां से प्राप्त किया जा सकता है।

सांसदों के फंड की निगरानी बिहार में योजना एवं विकास विभाग करता है। लोकसभा की वेबसाइट पर हर महीने इसका ब्योरा जारी होता है। हरेक सांसद को हर साल पांच-पांच करोड़ सांसद निधि में मिलते हैं। बिहार के 40 सांसदों को पांच साल में एक हजार करोड़ मिले। बैंकों में रहने और 15वीं लोकसभा की कुछ राशि बचने के कारण सांसदों को 1012 करोड़ मिले।

सांसद पर अनदेखी का आरोप
सांसदों को अपने फंड का उपयोग करने के लिए पूरी जानकारी दी जाती है। लेकिन अधिकतर सांसद मार्गदर्शिका की अनदेखी करते हैं या इसमें सुस्ती बरतते हैं। नियम के खिलाफ और आनन-फानन में सांसदों ने 1266 करोड़ की अनुशंसा कर दी। लेकिन नियमानुसार केंद्र सरकार ने 985 करोड़ ही मंजूर करते हुए 953 करोड़ जारी किए। छह मार्च तक 822 करोड़ खर्च हुए और 131 करोड़ बचे हैं।

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