November 16, 2019

पराली की समस्या से निपटने के लिए हरियाणा सरकार किसानों को देगी 80 प्रतिशत सब्सिडी

 

ठंड का मौसम आते ही दिल्ली और एनसीआर को प्रदूषण की समस्या से दो—चार होना पड़ता है और इसके लिए अक्सर पड़ोसी राज्यों हरियाणा और पंजाब दोषी ठहराया जाता रहा है। इस मामले में ग्रीन कोर्ट भी कई बार अपनी नाराजगी जाहिर कर चुकी है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए अब हरियाणा सरकार ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के साथ एक समझौता किया है जिसके तहत उनको पानीपत में 50 एकड़ ज़मीन दी गई है। जहां कंपनी पानीपत के आस-पास के जिलों से पराली इकट्ठा कर उसका इस्तेमाल इथेनॉल और बिजली बनाने में करेगी। इसके अतिरिक्त प्रदेश सरकार पराली को जलाने की बजाय इकट्ठा करने के लिए 80 प्रतिशत की सब्सिडी यानि 17 करोड़ 83 लाख रुपये भी आवंटित किए है।

गौरतलब है कि ‘स्वच्छता सर्वेक्षण 2019’ में प्रदेश के 4 जिले टॉप-100 शहरों में शामिल किए गए है, जिसमें करनाल, रोहतक, पंचकुला और गुरूग्राम है। वहीं अंबाला, पानीपत और यमुनानगर की रैंकिंग में भी सुधार आया है। राज्यों की बात करे तो लिस्ट में हरियाणा 10वें से 9वें स्थान पर पहुंच गया है। हरियाणा सरकार ने राज्य को सुंदर और विकसित बनाने के नियमित काम कर रही है जिसका नतीजा हमारे सामने है… इतना ही नहीं सरकार दिल्ली-NCR में पराली जलाने की वजह से होने वाले प्रदूषण को भी नियंत्रित करने के लिए नियमित प्रयास कर रही है।

पूरे प्रदेश में इस बार धान की पैदावार 32.50 लाख एकड़ में हुई, जोकि पिछले साल से 1.50 एकड़ ज्यादा है। इसके बावजूद 1.36 लाख टन पराली ही जलाई गई जोकि पिछले साल से 26 प्रतिशत कम है यानी पैदावार बढ़ने के बावजूद जिले में पराली कम जलाई गई है। इससे ये साफ होता है कि हरियाणा सरकार अपने प्रयासों में सफल हो रही है।

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