गांव की तस्वीर बदलने को काफी है एक समृद्ध तालाब

झारखंड के धनबाद में सरकारी मदद से बन रहे हैं ऐसे सीढ़ीदार तालाब।

धनबाद के सैकड़ों सुव्यवस्थित तालाब दे रहे जल संरक्षण की सीख, मत्स्य पालन, खेती, बागवानी सहित ग्रामीणों को मुहैया करा जीने का जरिया, किसानों की खाली-बंजर जमीन पर बन रहे तालाब

बलवंत कुमार
धनबाद:अब तालाबों के प्रति अवधारणा बदलने का वक्त आ गया है। एक तालाब पूरे गांव की तस्वीर बदल सकता है। झारखंड के धनबाद जिले में ऐसे सैकड़ों व्यक्तिगत तालाबों का निर्माण किया गया है, जो पानी से लबालब तो हैं ही, साथ ही ग्रामीणों को जीविका मुहैया कराने में भी सहायक साबित हो रहे हैं। जल संरक्षण की यह एक बेहतरीन मिसाल है।


हर मुश्किल का हल.. : नवनिर्मित इन नियोजित व सुव्यवस्थित तालाबों में जहां ग्रामीणों ने मत्स्य पालन शुरू कर दिया है, वहीं सब्जियां भी पैदा कर रहे हैं। ऐसे तालाबों का निर्माण धनबाद के निरसा, गोविंदपुर और कलियासोल प्रखंड में हो रहा है। इन तीनों प्रखंडों में 290 ऐसे अनूठे तालाबों का निर्माण किया जा रहा है, जिसका फायदा जल संरक्षण के साथ-साथ खेतों को साल भर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने, पूरे 12 महीने मौसमी सब्जियों की खेती, मछली पालन, पशु-पक्षियों को भीषण गर्मी में जल उपलब्ध कराने में कारगर है। इनमें से 100 से अधिक तालाब इस्तेमाल में आने लगे हैं। यूं कहें कि जल, जंगल, जमीन और पशुओं के विकास व संवर्धन के साथ ग्रामीणों को जीविकोपार्जन एवं खेती के लिए प्रेरित करना इसका मुख्य उद्देश्य है तो यह गलत नहीं होगा।
ये है इन तालाबों की खूबी.. : पेटसी नामक संस्था तालाबों को बना रही है। हर तालाब की लंबाई-चौड़ाई 100-100 फुट और गहराई 10 फुट है। तालाब को सीढ़ीनुमा आकार दिया गया है। इन्हीं सीढ़ियों पर सब्जी उत्पादन किया जाता है। बारिश के दिनों में तालाब के ओवरफ्लो करने पर आसपास के खेतों में कंटूर ट्रेंच एवं जल अवशोषक ट्रेंच बनाकर पानी रोकने का उपाय किया गया है।
लागत 2.70 लाख रुपये.. : पेटसी के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह और परियोजना से जुड़े परिजात परिमल ने बताया कि तालाब निर्माण के लिए किसानों को इसके फायदे के बारे में बताया गया। अभी तक जितने भी तालाब बनाए गए हैं सभी एकल लाभुक हैं। एक तालाब के निर्माण पर 2.70 लाख रुपये का खर्च आता है और यह राशि सौ फीसद सरकार के तरफ से दी जा रही है।
खुशहाली के रास्ते पर चल पड़ी जिंदगी.. : विजयपुर के बुधन बाउरी, गमला के छोटूलाल किस्कू, रामपुर के सेतु महतो और श्रवण राय जैसे कुछ लोग हैं, जिनकी जमीन पर तालाब का निर्माण पूरा हो गया है। ये अपनी जिंदगी को खुशहाली के रास्ते पर लेकर चल पड़े हैं। बुधन बाउरी बताते हैं कि उनकी जमीन बेकार पड़ी हुई थी। सरकार की योजना मिली तो उन्होंने तालाब निर्माण करा दिया। पारंपरिक तालाबों से हटकर इसकी डिजाइन है। इस कारण इस तालाब की सीढ़ियों पर सब्जी उत्पादन बेहतर तरीके से हो रहा है। यहां नेनुआ, करेला, लौकी आदि उपजाई जा रही है।
जीवनदायी हैं ये तालाब..कृषि विज्ञान केंद्र, धनबाद के वैज्ञानिक डॉ. आदर्श कुमार श्रीवास्तव और डॉ. राजीव कुमार मानते हैं कि जल संरक्षण का उचित प्रबंधन नहीं होने और वर्षा जल की बर्बादी के कारण भूजलस्तर रसातल में जा रहा है। मिट्टी में नमी समाप्त हो रही है, उपजाऊ भूमि भी बंजर हो रही है। ऐसे में जलछाजन के तहत ऐसे तालाबों का निर्माण जीवनदायी साबित हो रहा है। खासतौर पर झारखंड में, जहां जमीन समतल नहीं है, पहाड़ी इलाका है। राज्य के अधिकांश किसान वर्षा जल पर निर्भर हैं। प्रति वर्ष वर्षा जल का संचयन जरूरी है। ऐसे में ये तालाब जल संरक्षण में काफी कारगर साबित होंगे।( दैनिक जागरण से साभार)

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एक दशक से भी ज्यादा से पत्रकारिता में सकिय। संसद से लेकर दूर दराज के गांवो तक के पत्रकारिता का अनुभव। ग्रामीण समाज व जनसरोकार से जुड़े विषयों पर पत्र पत्रिकाओं में लेखन। अब पंचायत खबर के जरिये आपके बीच।

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