August 21, 2019

किसानों की आय दोगुनी करने वाले किसान कंवल सिंह चौहान को राष्ट्रपति ने पद्म पुरस्कार से नवाजा

जहां देश में आज खेती को घाटे का सौदा समझे जाने लगा है। वहीं हरियाणा के कुछ किसान इस मिथक को तोड रहे है। राई के अटेरना गांव में किसान बेबी कॉर्न की खेती कर लाखों रूपए कमा रहे है। किसानों ने गांव में ही अपने प्रयासों से किसान समिति का भी गठन किया है और अपनी फसल की पैकेजिंग कर बेचा जाता है। जो किसान के लिए बडे फायदे का सौदा साबित हो रही है। राष्टपति रामनाथ कोविंद किसानों के प्रेरणा स्त्रोत बने कंवल सिंह चौहान को पदमश्री पुरस्कार से सम्मानित किया।
बीए—एलएलबी कंवल सिंह चौहान अपने पिता की मौत के बाद परिवार का पेट पालने के लिए 1978 में पहली बार खेती करने उतरे। शुरूआत में उन्होंने परंपरागत धान की खेती की। लेकिन, 1985 में धान की खेती में आई बीमारी की वजह से कंवल सिंह चौहान को काफी नुकसान झेलना पड़ा। जिसके बाद कंवल सिंह चौहान ने खेत में बायोगैस प्लांट लगाकर जैविक खेती करनी शुरू कर दी। 1997 में पहली बार बेबी कॉन की खेती की और उसे बेचने के लिए फाइव स्टार होटलों के चक्कर काटे। कई जगहों पर बात न बनते देख कंवल सिंह चौहान पहली बार अजादपुर सब्जी मंडी में एक मशरूम की दुकान पर बेबीकॉन बेचने के लिए पहुंचे। इससे पहले आजादपुर में बेबीकॉन विदिशा से ही पहुंची थी। हालांकि शुरूआत में सफलता नहीं मिली। इसलिए, वर्ष 2000 में कंवल सिंह ने इसे नए तरीके से करने का निर्णय लिया। शुरुआती दौर में कंवल ने फल-फूल, सब्जी की प्रोसेसिंग यूनिट लगाई | मशरूम कल्टीवेशन, प्रोडक्शन ऑफ़ मशरूम, कम्पोस्ट आदि का प्रोडक्शन शुरू किया। ऑर्गेनिक फार्मिंग की गेहूं, चावल, बेबी कॉर्न, स्वीट कॉर्न और टमाटर की खेती ने इन्हें नित नए आयाम दिए। अपने गांव अटेरना में भारतीय शिक्षा ग्रामीण विकास आवाम अनुसंधान समिति के रूप में किसानों का प्रशिक्षण स्कूल शुरू किया जहाँ बेबी कॉर्न व स्वीट कॉर्न के उत्पादन शुरू किए गये।
बदहाल किसानों की हालत सुधारी
कंवल सिंह ने जहां अपने परिवार की हालत सुधारी। वहीं, उन्होंने खादर क्षेत्र के किसानों की हालत सुधार कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का काम किया। पारंपरिक खेती के कारण सोनीपत जिले के खादर क्षेत्र के किसानों को खेती हर साल घाटा देकर जाती थी। जिससे किसानों की माली हालत बेहद खराब थी। आम किसानों की तरह की किसान लोग कर्ज में डूबे थे। किसानों की माली हालत देख कंवल सिंह ने किसानों को बेबी कॉर्न और मशरूम उत्पादन के लिए प्रेरित किया और प्रशिक्षण दिलाया। आज उन्होंने पूरे गांव की तस्वीर बदलने के साथ ही करीब 200 लोगों को प्रत्यक्ष तौर पर रोजगार भी दिया है ।
 
आठ प्रकार के उत्पाद तैयार करते है किसान
खुद बेबी कॉर्न, मशरूम, स्वीट कॉर्न, मधुमक्खी पालन की खेती करने के साथ वे किसानों को भी जागरूक करने लगे। देखते ही देखते गांव के दूसरे किसान भी उनकी राह पर चल पड़े और अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ की। जब गांव में बेबी कॉर्न व स्वीट कॉर्न का उत्पादन बढ़ा तो किसानों को बाजार की दिक्कत न हो, इसके लिए कंवल सिंह ने वर्ष 2009 में फूड प्रोसेसिंग यूनिट शुरू कर दी। लगभग दो एकड़ में स्थित इस यूनिट में बेबी कॉर्न, स्वीट कॉर्न, अनानास, फ्रूट कॉकटेल, मशरूम बटन, मशरूम स्लाइस सहित लगभग आठ प्रकार के उत्पाद उनकी फूड प्रोसेसिंग यूनिट में तैयार किए जाते हैं।
 लोगों को मिला है रोजगार 
इस यूनिट से प्रतिदिन लगभग डेढ़ टन बेबी कॉर्न व अन्य उत्पाद इंग्लैंड व अमेरिका में निर्यात होता है। उनकी इस यूनिट से इस समय 10 गांव के 136 किसान सदस्य के रूप में जुड़े हुए हैं, जिनको न्यूनतम समर्थन मूल्य देकर उनकी फसल खरीदने का वादा करते हैं। प्लांट में करीब 200 लोगाों को सीधे तौर पर रोजगार भी मिला हुआ है।
 
अब तक मिले ये सम्मान 
कंवल सिंह चौहान अपने कामों की बदौलत आम से खास बनने लगे। गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी, जो वर्तमान में प्रधानमंत्री हैं, की ओर से 9 सितंबर 2013 को इन्हें सम्मानित किया गया। मार्च 2014 में प्रोग्रेसिव फार्मर अवॉर्ड पंजाब सरकार की ओर से दिया गया | राज्य स्तरीय फार्मर अवॉर्ड तत्कालीन मुख्यमंत्री हरियाणा सरकार की ओर से दिया गया |किसान दिवस पर 2012 में उद्यान रत्न अवॉर्ड’ 2012 दिया गया। अमित मेमोरियल फाउंडेशन उड़ीसा की ओर से एनजी रंगा फार्मर अवॉर्ड 2010 में, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) का अवार्ड 16 जुलाई 2011 को हरियाणा के मुख्यमंत्री की ओर से दिया गया। किसान दिवस पर इनोवेशन फार्मर अवॉर्ड पूसा कृषि मेला में 2010 में मिला, फार्मर अवॉर्ड आईएआरआई पूसा किसान मेले में 2009 में, सोनीपत रत्न अवॉर्ड जनवरी 2008 में, राजीव गांधी अवॉर्ड एग्रीकल्चर के लिए 2007 में, चौधरी देवीलाल पुरस्कार जिला स्तर का डिप्टी कमिश्नर सोनीपत की ओर से 15 अगस्त 2003 को उन्हें दिया गया। अभी इन्हें पद्मश्री का सम्मान दिल्ली में गणतंत्र दिवस के मुबारक मौके पर दिया गया है।
 
किसानों की आय दुगुनी करना है लक्ष्य
जिले के साथ-साथ पूरे प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बने कंवल सिंह चौहान अपनी इस कामयाबी को एक छोटा सा पड़ाव मानते हैं। उनका लक्ष्य प्रदेश के हर जिले में प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करके किसानों की आय को दोगुना नहीं 5 से  6 गुना करना है, ताकि किसी किसान का सिर कर्ज के पहाड़ के सामने झुक न सके।

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