March 24, 2019

उत्तर प्रदेश में गोपालक योजना बदल रही है किसानों की तक्दीर

उत्तर प्रदेश में दूध का उत्पादन बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न करने के लिए मुख्यमंत्री गोपालक योजना की शुरुआत की गई है। इस योजना के तहत पशुपालकों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी और कर्ज जमा करने में भी मदद दी जाएगी। किसानों व पशुपालकों को कर्ज जमा करने के लिए पांच साल का वक्त मिलेगा।

पिछली सरकारों ने भी डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए योजनाओं की शुरुआत की थी लेकिन उसकी रूपरेखा इतनी बड़ी थी कि किसानों ने इससे दूरी बना ली। पिछली सरकारों ने लार्ज एवं मिडिल लेवल पर डेयरी खोलने की योजना बनाई थी। इसके तहत सवा करोड़ व 50 लाख रुपये के दो प्लान बनाए गए थे। इसमें इन्वेस्टमेंट इतना ज्यादा था और रिस्क भी। इस वजह से यह योजना सफल नहीं हो सकी। किसानों को डर था कि अगर कुछ गड़बड़ी हो गई तो वे बैंक के डिफाल्टर बन जाएंगे और उनकी संपत्ति जब्त हो जाएगी।

पिछली योजना से सबक लेते हुए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ऐसी योजना लाई है जिसमें रिस्क कम हो और कम लागत में भी किसान इसको शुरू करने के लिए प्रेरित हो सकें। सरकार ने इसको देखते हुए मुख्यमंत्री गोपालक योजना की शुरुआत की है। नौ लाख रुपये की इस योजना से जुड़ने के लिए किसानों को मामूली रकम लगानी होती है। बाकी के रुपये सरकार उपलब्ध कराती है जिसे पांच साल में चुकाना होता है।

इस योजना का फायदा यह हुआ कि छोटे व सीमांत किसान भी इस योजना से जुड़कर डेयरी उद्योग में कदम रख रहे हैं। उनको मुफ्त दवाओं के साथ ही अच्छे सीमेन भी फ्री में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उनके दुधारु पशुओं को वह सीमन दिया जाता है जिसमें बछिया होने की संभावना 90 से 95 प्रतिशत तक होती है। इसका फायदा यह होता है कि बिना कोई अतिरिक्त पूंजी लगाए ही किसानों का पशुधन बढ़ता जाता है और इसके साथ ही उनकी आमदनी में भी इजाफा होता है।

खास बातें
-सरकार नौ लाख रुपये की योजना के तहत बैंकों के माध्यम से कर्ज के रूप में किसानों को सात लाख 20 हजार रुपये प्रदान करती है। एक लाख 80 हजार रुपये का इंतजाम किसान को ही करना होता है।
-किसानों को बैंक से मिलने वाले कर्ज का भुगतान पांच साल में 60 किस्तों में करना होता है।
-सरकार मासिक किस्तों के भुगतान के लिए मदद के तौर पर किसानों को 20 हजार रुपये प्रति वर्ष प्रदान करती है।
-सरकार की तरफ से किसानों को हर साल 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है।
-सरकार पांच साल में पशुओं की खरीद पर ढाई लाख रुपये की सब्सिडी भी देती है। योजना के बारे में पशुपालन विभाग भी अभियान चलाकर किसानों को जानकारी दे रहा है।
-मुख्यमंत्री पशुधन स्वास्थ्य योजना की भी शुरुआत की गई है जिसके तहत पशुओं को मुफ्त दवा प्रदान की जाएगी। सरकार ने पशुओं को अस्पतालों तक ले जाने के लिए वैन का प्रबंध ब्लॉक स्तर पर करने का भी निर्देश दिया है।
-इस योजना के तहत किसानों को 8 माह के भीतर दस दुधारु पशुओं को खरीदना होता है। शुरुआत दो या चार पशुओं से भी हो सकती है।
-इसके बाद किसानों को पशुओं की खरीद की जानकारी पशुपालन विभाग व कर्ज देने वाले बैंक को देनी होती है।
-योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को अपने क्षेत्र के पशु चिकित्साधिकारी के पास तीन प्रतियों में आवेदन पत्र को जमा करना होगा। यह योजना पहले आओ-पहले आओ के आधार पर शुरू की गई है। इसका मतलब है कि जो भी पहले आवेदन करेगा, कर्ज पाने का हकदार भी वही पहले बनेगा।
-एरिया के उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी अपनी रिपोर्ट मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को सौंपेंगे। इसके बाद यह लिस्ट निदेशालय भेजी जाएगी जहां पर लाभार्थियों का चयन होगा।
-जो अभ्यर्थी छूट जाएंगे, उनको वेटिंग लिस्ट में डाल दिया जाएगा। दोबारा बजट का आवंटन होने पर उनको योजना का लाभ मिलेगा।
पशुओं की खरीद के लिए नियम भी बना दिया गया है। किसानों को जानवर पशु मेले से ही खरीदने होंगे।
-पशुओं को प्रतिदिन कम से कम 10 लीटर दूध देना चाहिए। किसान दो चरणों में पांच-पांच के हिसाब से पशुओं की खरीद कर सकेंगे। पशुओं की खरीद पर जानकारी बैंक व पशुपालन विभाग को देनी होगी।
-किसानों को आठ महीने के भीतर दूध का उत्पादन 100 लीटर प्रति दिन तक पहुंचाना होगा।
-पशुओं की खरीद के वक्त ही उनका बीमा कर दिया जाएगा।
-किसानों को कर्ज के भुगतान की पहली किस्त छह महीने बाद जमा करनी होगी। इतना वक्त इसलिए दिया जाता है ताकि वे डेयरी उद्योग को पूरी तरह से व्यवस्थित कर लें।
नियम व शर्तें
यह योजना उत्तर प्रदेश के मूल निवासियों के लिए है। दूसरे राज्य के व्यक्ति मुख्यमंत्री गोपालक योजना के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं।
योजना पांच या दस दुधारु पशुओं के साथ शुरू की जा सकती है।
आवेदक की आय एक लाख रुपये सालाना से अधिक नहीं होनी चाहिए। आवेदक को आय का प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत करना होगा।
जो किसान पांच पशुओं के साथ व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उनको तीन लाख 60 हजार रुपये का कर्ज मिलेगा।
किसान के पास डेयरी स्थापित करने के लिए जमीन होनी चाहिए।
उसके पास पहले से पशु पालन का अनुभव होना चाहिए। पशुपालन का अनुभव न होने पर आवेदन रिजेक्ट कर दिया जाएगा।
नौ लाख रुपये की योजना के लिए किसानों को जो एक लाख 80 हजार रुपये का प्रबंध करना है, वह निर्माण के काम के लिए हैं। इससे टीन शेड व खड़ंजे का निर्माण करवाया जाएगा।
आवश्यक दस्तावेज
आवेदक के पास बैंक का पहले से कोई कर्ज नहीं होना चाहिए। अगर आवेदक ने पहले लिए किसी कर्ज में बैंक किस्त जमा नहीं की है तो उसका आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा।
एससी-एसटी, ओबीसी वर्ग के किसानों के पास जाति प्रमाण पत्र होना चाहिए।
तहसीलों से जारी किया गया आय प्रमाण पत्र भी संलग्न करना होगा।
आवेदक को आधार कार्ड भी लगाना होगा।
बैंक अकाउंट की डिटेल भी देनी होगी। इसमें पास बुक के पहले पन्ने की फोटोकॉपी लगानी होगी।
ऐसे होता है चयन
सबसे पहले आवेदन पत्र क्षेत्र के पशु चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में जमा करना होगा।
बाद में इसकी जांच मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा की जाएगी और रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी जाएगी।
मुख्यालय की एक टीम आवेदन पत्र विचार करेगी और बाद में लॉटरी निकाली जाएगी।
लॉटरी में जिस आवेदक का नाम होगा, उसको मुख्यमंत्री गोपालक योजना के तहत लोन प्रदान किया जाएगा।
छूटे अभ्यर्थियों का नाम वेटिंग लिस्ट में डाल दिया जाएगा। उनके नाम की दोबारा लॉटरी निकाली जाएगी।
चयनित होने के बाद लाभार्थी को एक लाख 80 हजार रुपये टीन शेड व अन्य निर्माण के लिए जमा कराने होंगे।
निर्माण सरकारी मानकों के अनुरूप होगा। डेयरी में पानी का भी प्रबंध किसानों को करना होगा।

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